हमारी उनसे; दिल से दिल की बात होगी!
वो मेरे हक में कोई बात न करेंगे;
मेरी नाकामियों का बस इजहार करेंगे!
समझ आएगा तो रहे उल्फत से गुमराह करेंगे;
मौसमी फूलों की बात करके; दिल मेरा सरशाद करेंगे!
पल्लू से मुझे बाँध के रखना; फितरत है उनकी;
मिल कर आज वो महफिल मेरी आबाद करेंगे!
दिन में सूरज हो; कितना भी तपता हुआ;
शाम के धुंधलके में वो बरसात करेंगे!
मिले उनका साथ तो सबकी बात सहेंगे;
हर किसी को अपना दिलदार न कहेंगे!
इसी बात से खुश हूँ ; शाम को वो बात करेंगे;
वो नगमा सुनाएँगे; महफिल की बात करेंगे!
पीले दाँतों को सुफेद और चमकीला करने को;
सुबह- रात कोलगेट का इस्तेमाल करेंगे!
जुबान शीरी करने को; वो जलेबी खाएँगे;
रसगुल्ला रोज रात को जुबाँ पर रखेंगे!
हमेशा ही उनके हुस्न का; कददाँ रहा मैं;
आज वो मुझसे इश्के- हकीकी की बात सुनेंगे!
राजीव रत्नेश

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