Sunday, June 8, 2025

तू समझ न पाई मुझको( शेर२)

यादों ने तेरी आज मुझे बुरी तरह सताया है;
आजा राह में; आगे समंदर का किनारा है!
तू समझ न पाई मुझको; साथ ही छोड़ दिया;
तेरे बिना आगे बढ़ना दूभर; छाया घनघोर अँधेरा है!

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!