लेकिन हार न मानी; अभिव्यक्ति को कर देता साकार!
हमेशा आजाद रहा; रहा आजाद ख्याल;
किसी नाते-रिश्ते में ने बाँध सका संसार!
जब्त सारी डायरियाँ हुईं; छीना गया लिखने का अधिकार
दोस्तों ने कहा फिर से वही कहानी लिखो; करके पुनर्विचार!
लिख सकते हो पहले से भी अच्छा; हिम्मत तो करो एकबार;
इसी प्रेरणा ने समझाया; तो लिखे फुटकर अशआर!
पास में कोई डायरी नहीं; नही रखता कोई अपने पास;
रफ कापी पे लिखता; पोस्ट करके देता पन्ने फाड़!
नहीं की किसी के प्रति कोई रचना चोली फाड़;
लिखने का क्षेत्र व्यापक; ब्रहमांड में जैसे भगवान!
राह का दरवेश हूँ; जो चाहे वो दुआ ले जाए;
रखता नहीं कोई सरोसामां अपने साथ!
संक्षिप्त कहानी यही' रतन' की;, करता सबसे उन्मुक्त प्यार;
रखा नहीं नाता; जीवन में किसी से; सिवा भगवान!

No comments:
Post a Comment