Sunday, June 8, 2025

बड़े अरमान से पिलाया था( शेर४)

कभी तेज हवा से सरसराहट; कर रहा था जंगल
नैन थे अकुलाए; नमी धीमे-धीमें फिसल रही थी!
बड़े अरमान से तूने पिलाया रूह- अफजा बा मेहरबानी;
ख्वाबों में आने वाली शाहजादी; कहाँ तड़प रही थी?

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!