Thursday, June 5, 2025

रतन से मिल जा आके( गजल)

मेरे पास आने में कितना वक्त लगाएगी?
मेरे साथ अपना कितना वक्त बिताएगी?

दुपट्टे को मसलेगी; जमीं कुरेदेगी;
आँचल में कब तक शरमाएगी?

चाल तेरी मस्त-मस्त; अदा शर्मीली;
अरमानों के जंगल की प्यास कब बुझाएगी?

जुबां तेरी कसीदा; गजल मेरा मिजाज;
जाम- ए- लब; जाम- ए- शराब कब पिलाएगी?

चलेगी निगाहों की चोरबाजारी कब तक?
चाँद से जुल्फों के बादल कब हटाएगी?

आँखें तेरी पारदर्शी; निशाना अचूक;
तीर हवा में कब तक चलाएगी?

गाल तेरे टमाटर; छुपाया है मालो असबाब;
मिले सुकूं दिलको; रूह अफजा कब पिलाएगी?

' रतन' से मिल जा आके; खुशबुओं की तरह;
जवानी का बोझ अकेली कब तक उठाएगी?
           राजीव रत्नेश

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