Friday, June 6, 2025

. जुंबिशे लब ने कुछ और कहा था (, शेर३)

बहुत पशेमानी हुई; आनेको कह के तू न आया;
हम इंतजार करते रहे कि तू अब आया; अब आया!
बहुत तरसाया तूने; जुबिशे लब ने तो कुछ और ही कहा था;
मुझे दिल की बरबादी का फसाना याद आया!

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