दिल में मचलती है तेरी ही तमन्ना; सँवरती है तेरी ही याद;
हिदायत दे गई हो बागबां को बिछड़ते- बिछड़ते भी;
मौसमे खिजां में भी उजड़ने नपाए हमारा चमन; तुम्हारा बाग!
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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