Sunday, June 1, 2025

भूल गई होती तू भी( शेर)

मैं अकेला था दुश्मन थे चार चार 
मँहगा पड़ जाता मुझे तेरा प्यार
आता न छोड़ कर महफिल तेरी तो
भूल गई होती तू भी करना आदाब

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