Sunday, February 8, 2026

अपना कोई नहीं ( कविता)

कभी- कभी ऐसा लगता है,
इतनी बड़ी दुनिया में,
अपना कोई नहीं/
बेकार ढूढ़ता हूँ मैं,
गैरों में भी,
अपने पन का,
कोई अहसास/
और इसी में,
बसर कर देता हूँ,
चंद अपने कीमती लमहात/
और तब भी पाता हूँ,
कहीं गैरियत की बू,
तो बड़ी उमस सी लगती है/
कभी- कभी ऐसा लगता है,
इतनी बड़ी दुनिया में,
अपना कोई नहीं/

         राजीव रत्नेश
        ++++++++++

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!