प्यास हद से गुजर आई है ( गजल)
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मेरे पैमाना- ए- दिल में तेरी याद
के जाम ने जो ली अँगड़ाई है/
मेरी नजरों में उस रात की
हर बात सिमट आई है/
तेरी भूली-बिसरी बातों की
तेरी तस्वीर ने याद दिलाई है,
तेरी याद आने से सदियों की
तन्हाई मुस्कराने पर आई है/
तेरी यादों की खुशबू जो
आज शबाब पर आई है,
तुझे बतलाऊँ क्या कि आज
दिल में मेरे क्या आई है/
तुझे आज अपनी बना सकता
चंद लमहात के लिए ही,
कि दिल की प्यास आज ' रतन'
हर हद से गुजर आई है//
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हम तुझे सदा देते रहेंगे, देखें कब तक असर होता है
तेरा और मेरा देखें कब तक दूसरी ठौर बसर होता है
हमारा तो तेरे बिना, किसी तरह से गुजारा होता है
याद में तेरी सारी रात जागते हैं, जब शहर सोता है//
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समंदर बीच कश्ती डूबी, हम जुदा हो गए,
हम किसी किनारे लगे, तुम जाने किस किनारे लगे/.
मिलना होगा तो मुकद्दर ही मिलाएगा,
मेरे वश कुछ न रहा, तुम्हारे हाथ सफीने से जा मिले//
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पहले-पहल जब तू आई थी, गुलबदन थी,
साँसों से तेरी फूलों की महक आती थी/
गुल्शन को हमारे जाने किसकी नजर लग गई,
पहले तू दिल पे सितम तो न ढ़ाती थी//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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