पिल दे पैमाने से साकी ( कवित)
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तेरी आँखें हैं मदमस्त मतवाली शराबी/
पिला दे जरा पैमाने से मुझको साकी/
जाम की तमन्ना है निगाहों में उतरने की,
फितरत है कुछ पलकों से तेरी समझने की,
आरजू- ए- दिल मुझे बेताब बनाए जाती है,
ख्वाहिश है तेरी निगाहों से उलझने की/
लगती है तेरी अदा कुछ- कुछ बचकानी,
पिला दे जरा पैमाने से मुझको साकी!
बरसती फिजा है, दिल को तेरी लगन है,
तुम्हारी निगाहों में आज बला की थकन है,
न उठाओगी आज भी रुख से पर्दा अगर,
समझ लो दिल में मेरे लगी तेरी अगन है/
उलझाओ निगाहों को इन सवालों से साकी!
पिला दे जरा पैमाने से मुझको साकी!
चटकती- मटकती आज ये कैसी फिजा है,
सब दिलवालों की आज ये कैसी रजा है,
अब तो आईना- ए- दिल का पर्दा खोल दे,
आ जाओ बज्म में, तुम्हारे बिना सब बेमजा है/
बना दे अपनी निगाहों को हर सवाल का जवाबी,
पिला दे जरा पैमाने से मुझको हसीं साकी!
चढ़ती जवानी का यही तो तकाजा है मेरा,
तुझसे पीने का आज का इरादा है मेरा,
तुम यूँ शरमाओगे, दामन झटकोगे इस तरह,
समझ लो कि बिना तमाशे का जनाजा है मेरा/
चाहना तो बन जाना तुम किसी दिन मेरी सफरी/
पिला दे जरा पैमाने से मुझको हसीं साकी!
चमन में आई बहार आज किस कदर खुशनुमा है
सारा आलम है खुश, खुश जो मेरा रहनुमा है,
बात चल है जब हुस्नो- इश्क की तो कहता हूँ,
तुम्हारे बिना ये मौसम बिलकुल बदगुमां है/
आके दिल में मेरे, भर दो जमाने भर की खुशी/
पिला दे जरा पैमाने से मुझको ऐ हसीं साकी!
औरों की महफिल में भी सज-धज के गया था,
औरों से दिल्लगी भी खूब जम के किया था,
मगर किसी ने किसी लायक मुझे नहीं समझा,
हाँलाकि जिन्दगी भर सबके गम में शामिल हुआ था/
चले भी आओ कि इश्क नहीं ये बाजारी/
पिला दे जरा पैमाने से मुझको ऐ हसीं साकी!
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
मेरे दिल से उठते हर सवाल का जवाब तुम्हीं हो,
जवानी की उठान, चाँदी की खूबसूरती की मिसाल
तुम्हीं हो/
मुझे भी भाया, जमाने को भी समझ में आया,
मेरे सपनों की साकी, मेरी ताजी गजल का उनवान
तुम्हीं हो/
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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