क्यूँ उनका इंतजार है?
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ऐ दिल क्यूँ बेकरार है, क्यूँ उनका इंतजार है?
वो खफा है फिर भी क्यूँ तुझे उनसे प्यार है?
सागर दिल नहीं बहलाएगा, मीना टूट जाएगा
न मिलेगा किनारा तुझे, सफीना डूब जाएगा,
बेवजह तड़प-तड़प के पुकारेगा तू उनको,
ऐ दिल! तू वीरानी- ए- मुहब्बत में डूब जाएगा
भूल जा उनको दुश्मन सारा संसार है
भूल जा उनको, इसी में तेरा गुजारा है,
आतिशे- फुर्कत ही तेरे गम का सहारा है
जामो- मीना से तौबा-तौबा अपनी तौबा कर ले
तेरी जान लेने पर आमादा हर शरारा है
प्यार तो प्यारे बस इक व्यापार है
तड़प से दिल हो तू पुरनम जाएगा
प्यार का आशियाँ तेरा जल जाएगा
तू वफा को खोजता फिरेगा बेसहारा
नतीजा होगा खुद को भूल जाएगा
फरेब उनका हर इक इजहार है
गुल्शन में अब बहार नहीं आएगी
तेरे सामने कोई घटा नहीं शरमाएगी
तेरी जिन्दगी में गम का अँधेरा छायेगा
अब नहीं कभी वो तेरे लिए गुनगुनाएगी
उनकी आँखों में नहीं कोई इकरार है
ऐ दिल! क्यूँ बेकरार है, क्यूँ उनका इंतजार है?
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करके खता वो बिल्कुल खामोश हैं
कहते हैं तो बस, हम कसूरवार नहीं//
सुनो दिलदारों की जो वो कहते हैं
जाम पे जाम पिलाओ, जो तुम पर मरते हैं
तुम्हारा घर बन गया है इक मयखाना
जहाँ कदम रखते खुदा भी डरते हैं //
तुम्हारी हर इक अदा पे लिखता हूँ मैं
तुम्हारी हर इक सदा पे लिखता हूँ मैं
तुम्हारे नाज से, तल्ख दिल को सुकूं देने को
मजबूर होकर अपनी कजा पे लिखता हूँ मैं
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राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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