Saturday, February 7, 2026

किसी हाल रतन को न भूल ( गजल)

किसी हाल रतन को न भूल   ( गजल)
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मैं तेरा सौदाई हूँ और तू मुझसे दूर/
आँखों में चमकता है नक्शा- ए- तूर/

समंदर में डगमगाती कश्ती अब तो,
सँभाले नहीं सँभलता अब तो मस्तूल/

तु हसीं है, दिल जबीं है, मेरा यकीं है,
तू ही मेरी बगिया की सुन्दर फूल/

बहारें चलेंगी चमन में, खुशबू फैलेगी,
भले उड़ रही हो, सारे जहां में धूल/

हिंडोला प्यार का नभ भी छुएगा,
बस प्यारी! थोड़ी देर तू और झूल/

तू भुला दे दुनिया, दुनिया भुला दे तुझे,
मगर किसी हाल तू" रतन'' को न भूल//
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सैकड़ों आस्मानी सितारों में माहताब है तू/
ऐ नाजनी! जाने कितने गुलों का शबाब है तू/
आरजू तेरी मुझको खींचती है रह- रह कर,
मेरे जीने के लिए मानिंद जामे- निगाह है तू//

                     राजीव रत्नेश
                मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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