किसी हाल रतन को न भूल ( गजल)
+++++++++++++++++++++++
मैं तेरा सौदाई हूँ और तू मुझसे दूर/
आँखों में चमकता है नक्शा- ए- तूर/
समंदर में डगमगाती कश्ती अब तो,
सँभाले नहीं सँभलता अब तो मस्तूल/
तु हसीं है, दिल जबीं है, मेरा यकीं है,
तू ही मेरी बगिया की सुन्दर फूल/
बहारें चलेंगी चमन में, खुशबू फैलेगी,
भले उड़ रही हो, सारे जहां में धूल/
हिंडोला प्यार का नभ भी छुएगा,
बस प्यारी! थोड़ी देर तू और झूल/
तू भुला दे दुनिया, दुनिया भुला दे तुझे,
मगर किसी हाल तू" रतन'' को न भूल//
"""""""""""
सैकड़ों आस्मानी सितारों में माहताब है तू/
ऐ नाजनी! जाने कितने गुलों का शबाब है तू/
आरजू तेरी मुझको खींचती है रह- रह कर,
मेरे जीने के लिए मानिंद जामे- निगाह है तू//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
*****************

No comments:
Post a Comment