पिला दे पैमाने से साकी ( कविता)
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तेरी आँखें हैं मदमस्त मतवाली शराबी,
पिला दे जरा पैमाने से मुझको साकी/
जाम की तमन्ना है निगाहों में उतरने की,
फितरत है कुछ पलको से तेरी समझने की,
आरजू- ए- दिल को बेताब बनाए जाती है,
ख्वाहिश है तेरी निगाहों से उलझने की/
लगती है तेरी अदा कुछ- कुछ बचकानी/
पिला दे जरा पैमाने से मुझको साकी/
बरसती फिजा है, दिल को तेरी लगन है,
तुम्हारी निगाहों में आज बला की थकन है,
न उठाओगी आज भी रुख से पर्दा अगर,
समझ लो दिल में मेरे लगी तेरी अगन ह

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