जिसने किया इकरारे- वफा ( गजल)
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जिसने किया इकरारे- वफा,
उसी से दिल लगा लिया/
दुहर गई पुरानी दास्तां,
इक गम सीने से फिर लगा लिया/
अब किससे करूँ मैं जाकर,
शिकायते- जफा हुजूर!
अच्छा हुआ कि आपने,
अपना दामन बचा लिया/
जिन हसरतों की तमन्ना थी,
जिस जिन्दगी का दावा था,
आज हाले- बेकस में,
इक खेल सा खिला दिया/
मौत से शिकवा नहीं कोई,
हमें तो जिन्दगी ने है मारा,
किसी ने जहर पिलाया,
किसी ने दिल बहला लिया/
दुनिया हँसी वक्ते- गम में मेरे,
फिर भी फिकर न हुई,
तुमने भी होकर मेहरबान,
मुझपे जो मुस्करा लिया/
माना तुमने काँटे बोये पथ में,
आशियाना भी मेरा फूँका,
फिर भी मजारे- इश्क पे हमने,
इक दीप जला दिया/
आज किसी बेगुनाह को दोष दे,
क्यूँ ये बेनूर" रतन''
जब तुमने ही इक दागे- बदनुमा,
माथे पे मेरे लगा दिया//
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हर कोई मुझको कहता है,
भूल जाऊँ मैं तुमको/
कोई नहीं कहता तुमको,
न आओ तुम सामने मेरे//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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