Saturday, February 7, 2026

जिसने किया इकरारे- वफा ( गजल)

जिसने किया इकरारे- वफा   ( गजल)
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जिसने किया इकरारे- वफा,
           उसी से दिल लगा लिया/
दुहर गई पुरानी दास्तां,
           इक गम सीने से फिर लगा लिया/

अब किससे करूँ मैं जाकर,
           शिकायते- जफा हुजूर!
अच्छा हुआ कि आपने,
           अपना दामन बचा लिया/

जिन हसरतों की तमन्ना थी,
           जिस जिन्दगी का दावा था,
आज हाले- बेकस में,
          इक खेल सा खिला दिया/

मौत से शिकवा नहीं कोई,
          हमें तो जिन्दगी ने है मारा,
किसी ने जहर पिलाया,
          किसी ने दिल बहला लिया/

दुनिया हँसी वक्ते- गम में मेरे,
          फिर भी फिकर न हुई,
तुमने भी होकर मेहरबान,
          मुझपे जो मुस्करा लिया/

माना तुमने काँटे बोये पथ में,
           आशियाना भी मेरा फूँका,
फिर भी मजारे- इश्क पे हमने,
            इक दीप जला दिया/

आज किसी बेगुनाह को दोष दे,
             क्यूँ ये बेनूर" रतन''
जब तुमने ही इक दागे- बदनुमा,
             माथे पे मेरे लगा दिया//
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हर कोई मुझको कहता है,
            भूल जाऊँ मैं तुमको/
कोई नहीं कहता तुमको,
            न आओ तुम सामने मेरे//

            राजीव रत्नेश
      मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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