Saturday, February 7, 2026

तुम ही दामन में आग लगाओ तो ( कविता)

तुम ही दामन में आग लगाओ तो  ( कविता)
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चोट लगी है दिल में अब,
        इस दिल को बहलाने कहाँ जाएँ?
तुम तो हारी हुई बाजी हो,
        हारी शय को गले लगाने क्या जाएँ/

मेरी उजड़ी बस्ती, लुटे नगमे,
        हर साँस घुट रही है,
हर तरफ तुम गुबार फैला गई हो,
        तो हम साँस लेने कहाँ जाएँ?

मेरी बेताब नजरें हर घड़ी,
         तुम्हारी राह देखा करती हैं,
अटक सी गई है साँस,
         तुमसे जान बचाने कहाँ जाएँ?

तुम मेरी यादों की मदमस्त,
          मधुर- मधुर सी हमशकल हो,
क्या कहूँ तुम्हारी बेशर्म हया को,
           तुमसे शरमाने कहाँ जाएँ/

तुम तो समझ न सकीं,
            भला गैर कोई समझेगा क्या?
अपनी उखड़ी हुई साँस से,
            गम की दास्तां सुनाने कहाँ जाएँ?

क्या कहूँ तुम्हारी बातों का,
             किसी से कुछ कहते नहीं बनता,
तुम्हारे सिवा किसी और को,
            तुम्हारा गिला समझाने कहाँ जाएँ?

मेरी तमन्नाओं का गला घुट गया,
             आरजू है कि जल रही है,
आशियाना मेरा तुमने फूँक दिया,
              दरगाह पे मन्नतें सुलगाने क्या जाएँ?

तुम मिलो तो कुछ बात बने,
               तुम बिन सोच कर भी होगा क्या?
उलझा हुआ है कबसे, दिल का,
                अफसाना, सुलझाने कहाँ जाएँ?

तुम्हारी बेवफाई को क्या कहूँ?
                ये जालिम चीज बड़ी है
तुम्हारी मुहब्बत का मुख्तसर सा,
                फसाना किसे सुनाने कहाँ जाएँ?

दुश्मन बन के माथे पे दाग लगाओ,
                 तो दाग छुड़ाने कहाँ जाएँ?
तुम्हीं मेरे दामन में आग लगाओ,
                 तो आग बुझाने कहाँ जाएँ?

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जमाने के दिए सारे जख्म अब तो रिसने लगे थे,
जिन्दगी में तेरे आने से जख्म सब तो भरने लगे थे/
महबूब मेरे! अपनी खरोंचों से जख्म कुरेद मत देना,
तेरी मुहब्बत से दिल के दाग अब तो सँवरने लगे थे//
                  '''"""""""""""

तू हुस्न का पैकर, चमकता है तेरा आनन,
रौशन है अँधेरों में भी, तू मेरे संगीत की सरगम/
आजा हम- तुम दो जिस्म एक जान बन कर रहें,
बादलों की बिजली तू, मेरे दिल से कर संगम//
                  """"''''''''''''''''

नाजुक-मिजाज, अलबेली नार हो तुम,
मेरे फलसफे की अकेली किरदार हो तुम/
दामन छुड़ा कर हमसे, क्या कर पाओगी?
वैसे तो दिखाती खुद को बड़ी जानदार हो तुम//

                  राजीव रत्नेश
           मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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