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ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो/
चमन में है बहार कि तुम गुलाब की आब हो/
बहार तुम बिन उदास, चमन दिल का वीरान है,
हवाओं में हर तरफ है बेचैनी, बेमजा हर शाम है/
कलियाँ बागों की चटकती हैं गुपचुप खामोश सी,
छा जाती है घटा, तू बरसात की पहली फुहार है/
दिल का करार, मन का सुकूँ, मुहब्बत का हुवाब हो,
ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो/
चाँद बिन चंदनियाँ के उदास, गम के मारे हैं सारे सितारे,
खामोशी तेरी अदा में देख कर, नजारे सारे खामोश हैं/
बरसता मौसम, उदास मयकदा, जो आज राजदां जुदा,
पैमानों में नहीं मदिरा, गमगीन आज मेरा दिलदार है/
मेरी मासूम मुहब्बत की तुम हसीं कायनात हो/
ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो//
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प्यार और दुश्मनी दोनों साथ निभाया जाता नहीं,
किसी मजबूर को यूँ सताया जाता नहीं/
समन्दर में विष भी है, अमृत भी है मगर,
प्यार में किसी को जहर तो पिलाया जाता नहीं//
राजीव रत्नेश
मुट्ठीगंज, इलाहाबाद/
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