Saturday, February 7, 2026

ऐ जाने- तमन्ना ( कविता)


********************

ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो/
चमन में है बहार कि तुम गुलाब की आब हो/

बहार तुम बिन उदास, चमन दिल का वीरान है,
हवाओं में हर तरफ है बेचैनी, बेमजा हर शाम है/

कलियाँ बागों की चटकती हैं गुपचुप खामोश सी,
छा जाती है घटा, तू बरसात की पहली फुहार है/

दिल का करार, मन का सुकूँ, मुहब्बत का हुवाब हो,
ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो/

चाँद बिन चंदनियाँ के उदास, गम के मारे हैं सारे सितारे,
खामोशी तेरी अदा में देख कर, नजारे सारे खामोश हैं/

बरसता मौसम, उदास मयकदा, जो आज राजदां जुदा,
पैमानों में नहीं मदिरा, गमगीन आज मेरा दिलदार है/

मेरी मासूम मुहब्बत की तुम हसीं कायनात हो/
ऐ जाने- तमन्ना! तुम मेरी जिन्दगी का चिराग हो//
                      ----------

प्यार और दुश्मनी दोनों साथ निभाया जाता नहीं,
किसी मजबूर को यूँ सताया जाता नहीं/
समन्दर में विष भी है, अमृत भी है मगर,
प्यार में किसी को जहर तो पिलाया जाता नहीं//

                     राजीव रत्नेश
             मुट्ठीगंज, इलाहाबाद/
             -----------------

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!