बस आस लगाए तुम्हारी ( गजल)
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तुम्हें पाने की तमन्ना में जिए जा रहे हैं/
इसी तरह खुशी-खुशी जिए जा रहे हैं/
मौसम आज बहुत खुशनुमा है, आ जाओ,
गीत उल्फत के कई दिन से गाए जा रहे हैं/.
हवायें तुम्हारे जुल्फों की महक लाती हैं,
हम खिड़की खोल के शरमाए जा रहे हैं/
मेरे शाने पे सर रख के तुम मुस्कराओ,
इसी हसरत से सीना फुलाए जा रहे हैं/
" रतन" को सौगातों से कोई लेना-देना नहीं,
बस आस लगाए तुम्हारी बिसात बिछाए जा रहे हैं//
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नग्म- ए- मुहब्बत तुमने सुनाया, आँखों में ढ़ाल कर/
कुबूल हमने किया, आँखों में आँखें डाल कर/
मस्ती भरी रग-रग में, मिलाया सुर को ताल से,
ले आई अपना प्यार तुम प्याले में उतार कर//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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