Saturday, February 7, 2026

रतन को तुम्हीं से प्यार है ( कविता)

रतन को तुम्हीं से प्यार है  ( कविता)
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जिन्दगी जाने- तलब! मौसमे- नौ बहार है/
शामे- वक्त फुर्कत में बस तेरी याद है/
बादे- सबा तेरी हमशक्ल, खुशबू- ए- गुलाब है,
दिल में धड़कता बस तेरा प्यार है/

सुकूं की वादियों मैं रौनके- निगार है/
शामे- वक्त फुर्कत में बस तेरी याद है/

वीरासत में मिली खुशी को बाँट लिया,
मेरे हिस्से यही कि तुमसे प्यार किया/
हर घड़ी की नवैयत, माजी का सिला,
इस पर क्या करें, गुजरे वक्त का गिला/

कली गुल्शन में इतराती बेपनाह है/
वक्ते- शाम फुर्कत में बस तेरी याद है/

कैशो- लैला के किस्से सुने बहुत मगर,
मुझको अब भी तुम प' एतबार है/
पैदा तुमसा हसीं जहां में खुदा ने किया,
आदमो- हौवा की यहीं से शुरुआत है/

फिरती हैं रहगुजारों पे हौवा की बेटियाँ,
मगर" रतन" को सिर्फ तुम्हीं से प्यार है//
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जो तुझे करते बने कर ले,
            जाकर रपट लिखा दे थाने में/
अपनी मुहब्बत की तसदीक,
            करता" रतन" अपने अफसाने में//

                      राजीव रत्नेश
                 मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!