रतन को तुम्हीं से प्यार है ( कविता)
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जिन्दगी जाने- तलब! मौसमे- नौ बहार है/
शामे- वक्त फुर्कत में बस तेरी याद है/
बादे- सबा तेरी हमशक्ल, खुशबू- ए- गुलाब है,
दिल में धड़कता बस तेरा प्यार है/
सुकूं की वादियों मैं रौनके- निगार है/
शामे- वक्त फुर्कत में बस तेरी याद है/
वीरासत में मिली खुशी को बाँट लिया,
मेरे हिस्से यही कि तुमसे प्यार किया/
हर घड़ी की नवैयत, माजी का सिला,
इस पर क्या करें, गुजरे वक्त का गिला/
कली गुल्शन में इतराती बेपनाह है/
वक्ते- शाम फुर्कत में बस तेरी याद है/
कैशो- लैला के किस्से सुने बहुत मगर,
मुझको अब भी तुम प' एतबार है/
पैदा तुमसा हसीं जहां में खुदा ने किया,
आदमो- हौवा की यहीं से शुरुआत है/
फिरती हैं रहगुजारों पे हौवा की बेटियाँ,
मगर" रतन" को सिर्फ तुम्हीं से प्यार है//
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जो तुझे करते बने कर ले,
जाकर रपट लिखा दे थाने में/
अपनी मुहब्बत की तसदीक,
करता" रतन" अपने अफसाने में//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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