Sunday, February 1, 2026

जान लेना है तो ( गजल)

जान लेना है तो...( गजल)
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जान लेना है तो, कोशिश करो मुस्कराने की,
कोई जरूरत नहीं है, तुम्हें खंजर चलाने की/

इक बार तो मुहब्बत की राहों में आकर देखो,
कोई जरूरत नहीं है तुम्हें, हमें आजमाने की/

ये तो दिल का सौदा है, दिल की लगन है सनम!
न करो बेकार कोशिश, खिलौनों से बहलाने की/

माना बेवक्त दोस्त भी बन जाते हैं दुश्मन मगर,
क्या जरूरत है तुम्हें, दुश्मनी निभाने की/

यूँ भी तो दिल का आशियाना जल गया है,
क्या जरूरत है तुम्हें, आग और भड़काने की/

मुहब्बत में तो लाजिम है शिकवा करना भी,
क्या इसीलिए थी कोशिश आशिक को मिटाने की/

दिल से दिल मिलाओ, तो मुहब्बत रंग दिखाए,
क्या जरूरत है पैमाने से पैमाना टकराने की/

ये तुम्हारी हंस की सी इठलाती चाल वल्लाह,
जान ले लेगी इक दिन तुम्हारे दीवाने की/

तुम तो रोशनी का चिराग जलाओ दिल में मेरे,
क्या जरूरत है तुम्हें, अँधेरा और बढ़ाने की/

मार डालने के लिए काफी हैं, नाजो- अंदाज तुम्हारे,
क्या जरूरत है जाम में, तुम्हें जहर मिलाने की/

कहीं आह ही तुम्हारी, जान न ले ले' रतन' की,
इसीलिए तो कहता हूँ, बनो याद वीराने की//

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         तुमने कहा मैंने सुना,
                      मैंने कहा तुमने सुना/
          मैंने कहा शर्मीली,
                       दीवाना तुमने कहा//
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            नजरों को सिर्फ तारीकियों
                         का अहसास ही था,
            जुल्फों को उन्होंने चेहरे से
                         हटाया चाँद निकल आया//

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                   राजीव रत्नेश
                   1974 ई०
                  मुट्ठीगंज, इलाहाबाद
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