Saturday, February 7, 2026

इक रात खुशियों में बहक जाने दे ( गजल)

इक रात खुशियों में बहक जाने दे  ( गजल)
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इक बार जुल्फें अपनी सहलाने दे/
इसी बहाने जरा दिल बहल जाने दे/

कमजर्फ जमाने ने अता किए गम,
तू देकर खुशी दिल को मचल जाने दे/

अभी तूने खुद को पहचाना ही कहाँ?
गुलों पर सुबह की ओस तो पड़ जाने दे/

मुहब्बत मेरी भी रंग लाएगी यकीनन,
अपने दिल से मेरा दिल तो मिल जाने दे/

चली आओ मुकाबिल महफिल के,
छाएगा तेरा नूर, शमां तो जरा ढ़ल जाने दे/

जिसने किया तुझसे शिकवा, वो मिटा,
अपने दीवाने का भी दम जरा निकल जाने दे/

देगी जिन्दगी मेरे किवाड़ पर दस्तक,
शब को जरा और निखर जाने दे/

मुहब्बत सौंपेगी तुझे अमानतें" रतन" की,
इक रात मुझे खुशियों में बहक जाने दे/

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खुदा करे जो भी गुजरे साथ गुजरे/
मेरी महफिल में उनकी रात गुजरे//

                 राजीव रत्नेश
        मुठ्ठी गंज, इलाहाबाद/
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