Sunday, February 1, 2026

खोल दो खिड़की ( कविता)

खोल दो खिड़की  ( कविता)
**********************

खोल दो खिड़की,
बहार को आने दो,
न खड़ी होओ,
यूँ तुम उदास होकर/
हो जाएगी,
बहार भी उदास,
तुम्हें उदास देखकर/

बस मुस्कराओ,
आँख से आँख,
तुम मिलाओ,
नकाबे- रुख उठाओ,
न तुम शरमाओ,
इश्क में शरमाना कैसा?
अपनों से दामन बचाना कैसा?
गर्दिशें तो आती ही हैं,
इनसे घबराना कैस?
न घबराओ,
न शरमाओ,
न पर्दे में आज तुम,
गुले- आरिज छुपाओ/
खोल दो खिड़की,
बहार को आने दो/

मयस्सर होगी रुते- बहार,
अंगार से दहकेंगे ये रुख्सार,
तुम्हीं तो दिल को तस्कीन दोगी,
करके वादा- ए- इकरार/
शर्मसार अदाएँ छोड़ो,
अपनी ये जफाएँ छोड़ो,
इश्क का लुत्फ,
न तुम व्यर्थ गँवाओ,
न तुम दही से मक्खन निकालो/

गर तुम्हें अजीज यही है,
तो बचेगा क्या?
केवल मठ्ठा,
वो तो बैठा देगी,
तुम्हारे आशिक का,
बिल्कुल भठ्ठा/
न तुम दूर जाओ,
जरा करीब आओ,
रुख से घूँघट हटाओ/
खोल दो खिड़की,
बहार को आने दो/

मस्ती भरी हवा भी,
चल रही है,
चलती रहेगी,
जानता हूँ, मुहब्बत की
सजा मिल रही है,
मिलती रहेगी/
भँवरे कली से मिल के,
फिर बिछड़ते हैं,
विछड़ते रहेंगे/
क्यूँकि,' खिलते हैं गुल
यहाँ खिल के विछुडने को,
मिलते हैं दिल यहाँ,
मिल के बिछुड़ने को'

तुमने तो देखा होगा,
देखा न तो सुना होगा/
फिल्म' शर्मीली' और
उसका यह गीत,
हाँ वही,
जिसमें शशी कपूर और राखी ने,
भूमिका निभाई थी,
बनाने वाले डायरेक्टर ने भी,
डबल रोल की क्या,
स्टोरी बनाई थी/

वाकई! अजब थी फिल्म,
पर हकीकत से परे थी,
वंशानुक्रम का सिला न था,
एक चंचल, एक उदास,
चंचल का बन जाना दीवाना,
उदास का बन जाना मयखाना/
तुम शायद उदास की,
चंचल बहन हो,
तभी तो नखरा किए,
जिद पकड़े बैठी हो/
बंद करके दरवाजे,
यूँ अकेले में मुझको,
तेवर दिखला रही हो/
खोल दो खिड़की,
बहार को आने दो//
       ------

हर अदा है तुम्हारी कातिल/
चाहे रोओ, चाहे मुस्कराओ//

इसी को कहते हैं
        जुनूने- मुहब्बत शायद/
नहीं है मुझे जमाने की
         फिकर जिस तरह//

       राजीव रत्नेश
    मुठ्ठीगेज, इलाहाबाद
    """"""""""""""""

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!