बीती बातों को न दुहराओ (गजल)
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दिल मेरा अब बिल्कुल भी नहीं उदास है/
गोया तुमसे मिलन की मुझे अब आस है/
नजरों में छाईं इश्क की नौरवेज नैरंगिया,
पहले से ठीक है, दिल अब नहीं बीमार है/
मेरी तमन्ना की शक्ल है जानी-पहचानी,
तुम पर ही तो दिल को अखि्तयार है/
ले आओ मेरी जर्जर कश्ती को बीच समंदर,
पतवार तुम्हारे हैं तो मुझे इत्मीनान है/
चाँद-सितारों से नहीं रही कोई उम्मीद,
आ जाओ मुझे तो बस तुम्हारा इंतजार है/
बहलाया दिल को, नजारों में न बहला,
वह तो बस तुम्हारे लिए बेकरार है/
बीती बातों को फिर से न दुहराओ,
' रतन' आजकल खुद ही अश्कबार है//
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तेरे जीते-जी तुझसे कुछ कह न सका/
तेरी मौत पर भी बिल्कुल खामोश रहा//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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