दिल बहला नहीं ऐसी तदबीरों से, हम भला और क्या करते/
खुद को फुसलाने के लिए क्या था तेरी जुल्फे- तस्वीर के सिवा,
संभलता नहीं दिल अब तो तुझ बिन, तू ही बता हम क्या करते/
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(२) तेरी आँखों में चमक, मेरी आँखों में पानी है,
तू चौदहवीं के चाँद सी जगमग, मेरी रानी है/
महबूब मेरे! तुझे हर कीमत पर अपना बनाना है,
तू मेरे अफसाने के किरदार की तर्जे- बयानी है/
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(३) आप मुद्दआ समझे, मगर क्या समझे क्या न समझे,
काश! तफसील से हमें भी कुछ बताया होता/
अपने ही हाथों जीत औ' मात है, हम भी कुछ करते,
नसीब में जो हो, काश! सिलसिला आपने बढ़ाया होता/
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(४) आखिर तुमने भी वही किया जो औरों ने किया,
मौका आने पर न गैरत से अपने कोई काम किया/
' गिरा अनयन, नयन बिनु बानी' की व्याख्या न बनी,
समझ नहीं आई मानस, तो तुलसी को क्यों बदनाम किया/
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(५) तमन्ना तेरी की थी और त तुझे ही पाया,
तुम्हें पाने के लिए हमने हर खतरा उठाया/
तुम पराई थी, अपने से फिर भी दूर न जाना,
तुम्हें दिमाग से समझा, दिल से अपना बनाया/
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(६) एक तरफ तुम हो, एक तरफ मैं हूँ,
अपना तो मुफलिसी में गुजारा होता है/
तेरी नजरों का सिर्फ इशारा होता है,
तेरा हर काम तो बस दिखावा होता है/
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राजीव रत्नेश
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