आज दश्त का वो शजर क्या हुआ/
सर का घूँघट सरक आया दोश पर,
खतावार थे तुम, तुम्हारा भरम क्या हुआ/
चूमने को बेताब रहा करती थीं सदा,
रुख्सार के काकुल का झूमर क्या हुआ/
ख्वाबों में तो सदा मेरे साथ ही रहते हो,
हो जाओगे पराए, वो खबर क्या हुआ/
थे न तुम्हारी नसीहतों के काबिल भी हम,
बेदखल हुआ दिल से, दिल का असर क्या हुआ/
आए हो मेरे घर पर बिन बताए, बिन बुलाए,
रकीब के मुँह पर तमाचा, इसमें गजब क्या हुआ/
तुम्हारी आँखों से अश्क दम- ब- खुद ढुलके,
गिरा जो आके मेरे आगोश में, वो समर क्या हुआ/
अरमानों का कारवां तेरी रहगुजर से गुजरा,
साथ का तमाम लाव-लश्कर क्या हुआ/
लम्हा-लम्हा टपका आँसुओं के साथ' रतन',
यादों के जुनूं से न झुका, वो सर क्या हुआ//
राजीव रत्नेश
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