Thursday, February 12, 2026

साकिया मेरा एक काम कर दे ( कविता)

साकिया मेरा एक काम कर दे  ( कविता)
++++++++++++++++++++++++++

साकिया आज मेरा एक काम कर दे/
अपनी नजर मेरे दिल के पार कर दे/
बहुतों का आज गुनहगार हूँ मैं,
दिले- मासूम को तू आज चाक कर दे/

कभी मुहब्बत की तलाश थी मुझे,
अब इक वफा की बची तलाश है/
एक जाम नहीं काफी साकी मेरे!
दिल में इक अनबुझी सी प्यास है/

आज कुछ इतना मगरूर हूँ मैं,
चाहे तो तू मुझे नजरों से मार दे/
साकिया आज मेरा एक काम कर दे,
अपनी नजर मेरे दिल के पार कर दे/

किसी ने हाथ भी थामा था हाले- गर्दिश में,
वो भी दो रोज के मेहमान बन के आए थे/
आँखों से उनके झलकती थी वफा,
फरेबों के पर दिल में उनके घुमड़ते साए थे/

मुझे मिसाल न दे हीर और राँझे की,
बस आज तू मेरी जिन्दगी तमाम कर दे/
साकिया आज मेरा एक काम कर दे,
अपनी नजर मेरे दिल के पार कर दे//
              ---------------


No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!