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( आयुष्मती सन्नो एवं चिरंजीव गिरीश के शुभ विवाहोत्सव
पर अभिनंदन- पत्र)
सन्नो और गिरीश का परिणय मंगलमय हो
जीवन-पथ दोनों का अति मधुमय हो/
हृदय प्रफुल्लित है हम सबका,
आज यह शुभ अवसर आया है/
जगवन्दन की महत् कृपा ने,
आज बृहत् रूप दिखलाया है/
राम सद्धश हैं श्री गिरीश जी,
सीता रूप है सन्नो सुकुमारी/
दोनों के पावन-परिणय पर आज,
सभी लोग हैं आनंदित भारी/
हल्की मुस्कानों से सँवरती दुनिया ज्योतिर्मय हो,
सन्नो और गिरीश का परिणय मंगलमय हो/
निज पुत्री का वधुरूप देख कर,
प्रमुदित हैं पिता बृजमोहन अपार/
आज पावन-परिणय के शुभ अवसर पर,
गद्गद चाचा जगबहादुर का हृदय विशाल/
स्वागत में भगवती, सतीश और,
राजबहादुर खुश तीनों भाई/
खुशियों का सागर उमड़ा है अपार,
हर्ष की सरिता सबके मन में लहराई/
स्वप्निल आभा में तरंगित जीवन स्वप्नमय हो,
सन्नो और गिरीश का परिणय मंगलमय हो/
प्रेमाश्रु नयनों में भर कर,
होकर मन में सुखी महान,
पिता बृजमोहन आज कर रहे,
युगल- करों से कन्यादान/
कन्या के बहनोई सदानन्द,
विरेन्द्रकुमार और बैठे हैं भगवत् प्रसाद/
रहे वर-वधू की जोड़ी अमर,
मन से देते ताऊ जगमोहन आशिर्वाद/
हर सुव्यवस्थित भावना का आधार निश्छल हो,
सन्नो और गिरीश का परिणय मंगलमय हो/
सुनो सन्नो बहना, आदर बड़ों का करना,
और सबसे हिलमिल कर रहना/
पति की आज्ञा और खुशी का,
ध्यान तुम हमेशा ही रखना/
कि तुम्हारे सुखों का यही है ठिकाना,
वचन सात फेरों के न भूल जाना/
विदा करके पिता ने भी चैन पाया,
सुरक्षा में था अभी तक धन पराया/
महके सदा फुलवारी जीवन तुम्हारा" रत्नमय" हो,
सन्नो और गिरीश का परिणय मंगलमय हो//
राजीव रत्नेश
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
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