+++++++++++++++++++++
तुमने महफिल में रोशनी होने के पहले दिया बुझा दिया/
दिखा के बेरुखी नन्हा-सा मासूम मेरा जिया जला दिया/
गर हौसला न था तो न बढ़तीं राहों में इश्क के,
न करतीं इंतजार, न आती पास मेरे सट के/
जाने- जानां! ये तुम्हारा नखरा दिखाना समझ नहीं आता,
टान्ट किया तुमने, क्या मिला मुझे इस रिस्क में/
तुमने तो बड़ी बेकार सी, ये कैसी अदा दिखा दिया/
अन्जाने में मुझको प्यार का जुआ खिला दिया/
अब कैसे आ सकूँगा राहों में तुम्हारे,
साथ रहते हैं और भी दीवाने तुम्हारे/
मेरे पास तो सिर्फ सायकिल ही है अदना सी,
उनके पास तो स्कूटर है, रहते हैं सूट सँवारे/
तुमने मेरी दुनिया लूट के, गैरों की दुनिया सजा दिया/
मेरा घर उजाड़ कर गैरों का घर बसा दिया/
अब तुमसे कहाँ मिलूँ, क्या बस में चलूँ साथ,
मैं भी कोई बढ़िया सा खेल खेलूँ तुम्हारे साथ/
मैं भेजूँगा अपने जासूस को तुम्हारे पीछे,
देखने को क्या आग लगाती हो तुम मेरे साथ/
मैं ही क्यूँ रहूँ पीछे, तुमने तो ये आग लगा दिया/
झूठमूठ ही बेरुखी का ये झूठा साज बजा दिया/
तुमने बिजली गिराई है फूल बरसाने के बाद,
साजे- दिल तोड़ दिया है, नगमा गुनगुनाने के बाद/
अब तो ऐसा लगता है, बड़ी सुर्खाब वाली हो,
बड़ी शर्मसार बनती हो दिल चुराने के बाद/
ये बात थी तो, जाने क्यूँ मेरा दिल चुरा लिया/
फिर समझा मुझे बेगाना भी, दुश्मन भी बना लिया/
तुमने महफिल में रोशनी होने के पहले दिया बुझा दिया,
दिखा के बेरुखी नन्हा-सा मासूम मेरा जिया जला दिया//
तुम क्या तोड़ोगी दिल किसी का,
अपने दिल को पहले लो संभाल/
खुद ही आकर दुम हिलाती हो,
झूठ-मूठ का करती हो बवाल//
राजीव रत्नेश
मुट्ठीगंज, इलाहाबाद/
"""""""""""""""""""""""""""

No comments:
Post a Comment