Thursday, February 12, 2026

तुमसे है गुजारिश मेरी ( कविता)

तुमसे है गुजारिश मेरी  ( कविता)
+++++++++++++++++++++

ऐ सनम! तुमसे है गुजारिश मेरी,
मेरे तसब्बुर में भी न तुम आओ/
तुम्हें मालूम नहीं है दस्तूरे- मुहब्बत,
न तुम मेरे दिल को आज भरमाओ/

ये जो सैकड़ों मुहब्बत की दास्तानें हैं,
हीर-राँझा, सोहनी- महीवाल के फसाने हैं/
उनकी बाबत तुम्हें कुछ भी मालूम नहीं,
उनको गुजरे हुए बीत गए जमाने हैं/

हमारी मुहब्बत बिल्कुल रुहानी है,
इसे जिस्मानी का सामां न बनाओ/
ऐ सनम तुमसे है गुजारिश मेरी,
मेरे तसब्बुर में भी न तुम आओ/

जिन्दादिली की बातें भी बहुत सुनी हैं,
लोगों की सीख भी हमने बहुत गुनी है/
अपना सभी कुछ खो के हमने ये पाया,
एक मुहब्बत ही हर चीज से बड़ी है/

हाले- जिगर कुछ दूँ भी ठीक नहीं है,
न मुझे तुम अब और तड़पाओ/
ऐ सनम! तुमसे है गुजारिश मेरी,
मेरे तसब्बुर में भी न तुम आओ/

हम प्यार में तूफां से टकरा सकते थे,
बेगाने तो क्या अपनों से टकरा सकते थे/
काश! तुमने साथ दे के देखा होता,
हम हर हाल में तुम्हें अपनी बना सकते थे/

अब तो बिगड़ गईं हैं बातें भी सारी,
न तुम मुझे गुजरा जमाना याद दिलाओ/
ऐ सनम! तुमसे है गुजारिश मेरी,
मेरे तसब्बुर में भी न तुम आओ//
          ----------------

जितने तुम दूर होते गए, दर्द बे दस्तो- पा होता गया,
ऐ बेदर्द सुन- समझ, मैं परायों से बावस्ता होता गया/
आहिस्ता कदमों से चलो, चमन के गुल जाग जाएँगे,
दिन पर दिन इश्क मेरा, दूसरों को रास्ता देता गया//

                       राजीव रत्नेश
                   मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद/
                    """""""""""""""""""""""""

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!